Wednesday, 28 May 2014

इमली

इमली- 
इमली से हम सब परिचित हैं | इमली के वृक्ष काफी ऊँचे होते हैं तथा सघन छायादार होने के कारण सडकों के किनारे भी इसके वृक्ष लगाए जाते हैं | इमली का वृक्ष उष्णकटिबंधीय अफ्रीका तथा मेडागास्कर का मूल निवासी है | वहां से यह भारत में आया और अब पूरे भारतवर्ष में प्राप्त होता है | यहाँ से ईरान तथा सऊदी अरब में पहुंचा जहाँ इसे तमार-ए-हिन्द (भारत का खजूर ) कहते हैं |इसका पुष्पकाल फ़रवरी से अप्रैल तथा फलकाल नवंबर से जनवरी तक होता है | इसके फल में शर्करा,टार्टरिक अम्ल,पेक्टिन,ऑक्जेलिक अम्ल तथा मौलिक अम्ल आदि तथा बीज में प्रोटीन,वसा,कार्बोहायड्रेट तथआ खनिज लवण प्राप्त होते हैं | यह कैल्शियम,लौह तत्व,विटामिन B ,C तथा फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है |आज हम आपको इमली के औषधीय गुणों से अवगत करा रहे हैं -
१- १० ग्राम इमली को एक गिलास पानी में भिगोकर,मसल-छानकर ,शक्कर मिलाकर पीने से सिर दर्द में लाभ होता है |
२- इमली को पानी में डालकर ,अच्छी तरह मसल- छानकर कुल्ला करने से मुँह के छालों में लाभ होता है|
३- १० ग्राम इमली को १ लीटर पानी में उबाल लें जब आधा रह जाए तो उसमे १० मिलीलीटर गुलाबजल मिलाकर,छानकर, कुल्ला करने से गले की सूजन ठीक होती है |
४-इमली के दस से पंद्रह ग्राम पत्तों को ४०० मिलीलीटर पानी में पकाकर ,एक चौथाई भाग शेष रहने पर छानकर पीने से आंवयुक्त दस्त में लाभ होता है |
५- इमली की पत्तियों को पीसकर गुनगुना कर लेप लगाने से मोच में लाभ होता है |
६-इमली के बीज को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद में लाभ होता है |
७- गर्मियों में ताजगी दायक पेय बनाने के लिए इमली को पानी में कुछ देर के लिए भिगोएँ व मसलकर इसका पानी छान लें। अब उसमें स्वादानुसार गुड़ या शक़्कर , नमक व भुना जीरा डाल लें। इसमें ताजे पुदीने की पत्तियाँ स्फूर्ति की अनुभूति बढ़ाती हैं ,अतः ताजे पुदीने की पत्तियाँ भी इस पेय में डाली जा सकती हैं |
नोट -- चूँकि इमली खट्टी होती है अतः इसे भिगोने के लिए कांच या मिट्टी के बर्तन का उपयोग किया जाना चाहिए |


Tuesday, 27 May 2014

Krishna Ji Photo

                                                                             



















जाट कहै सुम जाटणी इणी गांव में रैणो ऊंट बिलाई लेगई हांजी हांजी कहणों।

                           
ऊजड़ खेड़ा फिर बसै, निरधनियां धन होय।
 
जोबन गयो न बावड़ै मतना द्यो थे खोय।

कागा कुत्ता कुमाणसा, तीन्यूं एक निकास।
ज्यां ज्यां सेर्यां नीसरै, त्यां त्यां करे बिनास।
किरपण कै दालद नही, ना सूरां कै सीस।
दातारां कै धन नहीं, ना कायर कै रीस।
गैलो भलो न कोस को, बेटी भली न एक।
मांगत भली न बाप की, साहेब राखै टेक।
घर में सालो, दीवाल में आलो,आज नहीं तो काल दिवालो।
चालणी को चाम, घोडै की लगाम,
संजोगी को जाम, कदे न आवै काम।
जननी जमे तो दोय जण, के दाता के सूर,
नातर रहजे बांझड़ी, मती गंवावे नूर।
जाट कहै सुम जाटणी इणी गांव में रैणो
ऊंट बिलाई लेगई हांजी हांजी कहणों।