Wednesday, 19 February 2014

लड़कियां आखिर बिंदी क्यों लगाती है

लड़कियों को माथे पर बिंदी लगाए हुए आपने कई बार देखा होगा। कई बार बिंदियों को देखकर आपकी नजरें ठहर भी गई होगी, लेकिन शायद ही कभी सोचा होगा कि लड़कियां आखिर बिंदी लगाती है तो क्यों।

चालिए अब तक अगर इस रहस्य को नहीं जान पाएं हैं तो आज इस रहस्य से हम आप मिलकर पर्दा उठाते हैं। दरअसल लड़कियों के माथे पर बिंदी लगाने का शास्त्रीय मत वही है जो पुरुषों के द्वारा माथे पर चंदन और सिंदूर लगाने का कारण माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार कुंवारी कन्याएं नवदुर्गा का प्रतीक होती है और विवाहित लड़कियां लक्ष्मी और गौरी का स्वरुप मानी जाती है। यह दोनों देवियां चिर सुहाग का प्रतीक मानी जाती है।

इसलिए इनके प्रतीक चिन्ह के रुप में विवाहित महिलाओं द्वारा लाल बिंदी या कुमकुम की बिंदी लगाने का विधान है। माना जाता है कि इससे सौभाग्य और समृद्घि बढ़ती है। पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है।

बिंदी ज्योतिष और विज्ञान
जबकि ज्योतिष और विज्ञान की दृष्टि से यह माना जाता है कि स्त्रियों में शुक्र और चन्द्र का प्रभाव अधिक होता है। इससे इनका मन अधिक चंचल होता है।

माथे पर जहां बिंदी लगाई जाती है वहां आज्ञा चक्र होता है। आज्ञा चक्र के संतुलित रहने से चंचलता में कमी आती है। बिंदी और कुमकुम लगाने से यह चक्र नियंत्रित होता है। इस कारण से भी लड़कियों के माथे पर बिंदी लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।



लड़कियों को माथे पर बिंदी लगाए हुए आपने कई बार देखा होगा। कई बार बिंदियों को देखकर आपकी नजरें ठहर भी गई होगी, लेकिन शायद ही कभी सोचा होगा कि लड़कियां आखिर बिंदी लगाती है तो क्यों।

चालिए अब तक अगर इस रहस्य को नहीं जान पाएं हैं तो आज इस रहस्य से हम आप मिलकर पर्दा उठाते हैं। दरअसल लड़कियों के माथे पर बिंदी लगाने का शास्त्रीय मत वही है जो पुरुषों के द्वारा माथे पर चंदन और सिंदूर लगाने का कारण माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार कुंवारी कन्याएं नवदुर्गा का प्रतीक होती है और विवाहित लड़कियां लक्ष्मी और गौरी का स्वरुप मानी जाती है। यह दोनों देवियां चिर सुहाग का प्रतीक मानी जाती है।

इसलिए इनके प्रतीक चिन्ह के रुप में विवाहित महिलाओं द्वारा लाल बिंदी या कुमकुम की बिंदी लगाने का विधान है। माना जाता है कि इससे सौभाग्य और समृद्घि बढ़ती है। पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है।

बिंदी ज्योतिष और विज्ञान
जबकि ज्योतिष और विज्ञान की दृष्टि से यह माना जाता है कि स्त्रियों में शुक्र और चन्द्र का प्रभाव अधिक होता है। इससे इनका मन अधिक चंचल होता है।

माथे पर जहां बिंदी लगाई जाती है वहां आज्ञा चक्र होता है। आज्ञा चक्र के संतुलित रहने से चंचलता में कमी आती है। बिंदी और कुमकुम लगाने से यह चक्र नियंत्रित होता है। इस कारण से भी लड़कियों के माथे पर बिंदी लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

#JAIMAGAYATRI

Tuesday, 18 February 2014

ये महामंत्र है हर उस समय के लिये जब आप कोई नया काम करने जा रहे हों, घर से बाहर निकल रहे हों

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा ह्रदय राखि कौसलपुर राजा
-
ये महामंत्र है हर उस समय के लिये जब आप कोई नया काम करने जा रहे हों, घर से बाहर निकल रहे हों, कहीं यात्रा पे जा रहे हों.. देखिये, महामंत्र जपने के लिये भी और उससे जादा करने के लिये.. प्रभु राम को अपने हृदय में बैठा लो, उनके नाम का सहारा ले लो.. छोटी सी बिल्ली से डर जाते हो गर वो रास्ता काट जाए.. तब ये मंत्र जप लेना.. बेचारी बिल्ली से कहीं जादा बड़ा ( सबसे बड़ा ) हमारे रघुनाथ जी का नाम है..
‘प्रबिसि नगर कीजै सब काजा ह्रदय राखि कौसलपुर राजा’
- ये महामंत्र है हर उस समय के लिये जब आप कोई नया काम करने जा रहे हों, घर से बाहर निकल रहे हों, कहीं यात्रा पे जा रहे हों.. देखिये, महामंत्र जपने के लिये भी और उससे जादा करने के लिये.. प्रभु राम को अपने हृदय में बैठा लो, उनके नाम का सहारा ले लो.. छोटी सी बिल्ली से डर जाते हो गर वो रास्ता काट जाए.. तब ये मंत्र जप लेना.. बेचारी बिल्ली से कहीं जादा बड़ा ( सबसे बड़ा ) हमारे रघुनाथ जी का नाम है..

एसिडिटी का कारण

कई बीमारियां ऐसी होती हैं। जिसे हम खुद ही बुलावा देते हैं। कहने का मतलब यह है कि हमारी गलत जीवनशैली ही ऐसे रोगों को बढ़ावा देती है। एसिडिटी ऐसे ही रोगों में से एक है। एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (GERD) के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आज इससे हर दूसरा व्यक्ति या महिला पीडि़त है। एसिडिटी होने पर शरीर की पाचन प्रक्रिया ठीक नहीं रहती।

एसिडिटी का कारण?
आधुनिक विज्ञान के अनुसार आमाशय में पाचन क्रिया के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा पेप्सिन का स्रवण होता है। सामान्य तौर पर यह अम्ल तथा पेप्सिन आमाशय में ही रहता है तथा भोजन नली के सम्पर्क में नही आता है। आमाशय तथा भोजन नली के जोड पर विशेष प्रकार की मांसपेशियां होती है जो अपनी संकुचनशीलता से आमाशय एवं आहार नली का रास्ता बंद रखती है तथा कुछ खाते-पीते ही खुलती है। जब इनमें कोई विकृति आ जाती है तो कई बार अपने आप खुल जाती है और एसिड तथा पेप्सिन भोजन नली में आ जाता है। जब ऐसा बार-बार होता है तो आहार नली में सूजन तथा घाव हो जाते हैं।इसकी वजह गलत खान-पान, आरामदायक जीवनशैली, प्रदूषण, चाय, कॉफी, धूम्रपान, अल्कोहल और कैफीनयुक्त पदार्थों का ज्यादा इस्तेमाल करना है।

एसिडिटी के लक्षण?
एसिडिटी के लक्षणों में हैं सीने और छाती में जलन। खाने के बाद या प्राय: सीने में दर्द रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता है। इसके अलावा गले में जलन और अपचन भी इसके लक्षणों में शामिल होता है। जहां अपचन की वजह से घबराहट होती है, खट्टी डकारें आती हैं। वहीं खट्टी डकारों के साथ गले में जलन-सी महसूस होती है।
कुछ घरेलू उपचार-
1:
हर तीन टाइम भोजन के बाद गुड जरुर खाएं। इसको मुंह में रखें और चबा चबा कर खा जाएं।
2:
एक कप पानी उबालिये और उसमें एक चम्मच सौंफ मिलाइये। इसको रातभर के लिए ढंक कर रख दीजिये और सुबह उठ कर पानी छान लीजिये। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाइये और तीन टाइम भोजन के बाद इसको लीजिये।
3:
एक गिलास गर्म पानी में एक चुटकी कालीमिर्च चूर्ण तथा आधा नींबू निचोड़कर नियमित रूप से सुबह सेवन करें। इसके साथ ही सदाल के रूप मे मूली को जरुर शामिल करें। उस पर काला नमक छिडक कर खाएं।
4:
एक लौंग और एक इलायची ले कर पाउडर बना लें। इसको हर मील के बाद माउथफ्रेशनर के रूप में खाएं। इसको खाने से एसिडिटी भी सही होगी और मुंह से बदबू भी नहीं आएगी।

ऐसे करें बचाव-
1.
समय पर भोजन करें और भोजन करने के बाद कुछ देर टहलें ।
2.
अपने खाने में ताजे फल, सलाद, सब्जियों का सूप, उबली हुई सब्जी को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित अनाज खूब खाएं। ये विटामिन बी और ई का बेहतरीन स्रोत होते हैं जो शरीर से एसिडिटी को बाहर निकाल देते हैं।
3.
खाना हमेशा चबा कर और जरूरत से थोड़ा कम ही खाएं। सदैव मिर्च-मसाले और ज्यादा तेल वाले भोजन से बचें।
4.
अपने रोजमर्रा के आहार में मट्ठा और दही शामिल करें।
5.
शराब और मांसाहारी भोजन से परहेज करें।
6.
पानी खूब पिएं। याद रखें इससे न सिर्फ पाचन में मदद मिलती है, बल्कि शरीर से टॉक्सिन भी बाहर निकल जाते हैं।
7.
खाने के बाद तुरंत पानी का सेवन न करें। इसका सेवन कम से कम आधे घंटे के बाद ही करें।
8.
धूम्रपान, शराब से बचें।
9.
पाइनेपल के जूस का सेवन करें, यह एन्जाइम्स से भरा होता है। खाने के बाद अगर पेट अधिक भरा व भारी महसूस हो रहा है, तो आधा गिलास ताजे पाइनेपल का जूस पीएं। सारी बेचैनी और एसिडिटी खत्म हो जाए
10.
आंवले का सेवन करें हालांकि यह खट्टा होता है, लेकिन एसिडिटी के घरेलू उपचार के रूप में यह बहुत काम की चीज है।
11.
गैस से फौरन राहत के लिए 2 चम्मच ऑंवला जूस या सूखा हुआ ऑंवला पाउडर और दो चम्मच पिसी हुई मिश्री ले लें और दोनों को पानी में मिलाकर पी जाएं।
कई बीमारियां ऐसी होती हैं। जिसे हम खुद ही बुलावा देते हैं। कहने का मतलब यह है कि हमारी गलत जीवनशैली ही ऐसे रोगों को बढ़ावा देती है। एसिडिटी ऐसे ही रोगों में से एक है। एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (GERD) के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आज इससे हर दूसरा व्यक्ति या महिला पीडि़त है। एसिडिटी होने पर शरीर की पाचन प्रक्रिया ठीक नहीं रहती।

 एसिडिटी का कारण?
आधुनिक विज्ञान के अनुसार आमाशय में पाचन क्रिया के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा पेप्सिन का स्रवण होता है। सामान्य तौर पर यह अम्ल तथा पेप्सिन आमाशय में ही रहता है तथा भोजन नली के सम्पर्क में नही आता है। आमाशय तथा भोजन नली के जोड पर विशेष प्रकार की मांसपेशियां होती है जो अपनी संकुचनशीलता से आमाशय एवं आहार नली का रास्ता बंद रखती है तथा कुछ खाते-पीते ही खुलती है। जब इनमें कोई विकृति आ जाती है तो कई बार अपने आप खुल जाती है और एसिड तथा पेप्सिन भोजन नली में आ जाता है। जब ऐसा बार-बार होता है तो आहार नली में सूजन तथा घाव हो जाते हैं।इसकी वजह गलत खान-पान, आरामदायक जीवनशैली, प्रदूषण, चाय, कॉफी, धूम्रपान, अल्कोहल और कैफीनयुक्त पदार्थों का ज्यादा इस्तेमाल करना है।

 एसिडिटी के लक्षण?
एसिडिटी के लक्षणों में हैं सीने और छाती में जलन। खाने के बाद या प्राय: सीने में दर्द रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता है। इसके अलावा गले में जलन और अपचन भी इसके लक्षणों में शामिल होता है। जहां अपचन की वजह से घबराहट होती है, खट्टी डकारें आती हैं। वहीं खट्टी डकारों के साथ गले में जलन-सी महसूस होती है।
 कुछ घरेलू उपचार-
1:हर तीन टाइम भोजन के बाद गुड जरुर खाएं। इसको मुंह में रखें और चबा चबा कर खा जाएं।
 2:एक कप पानी उबालिये और उसमें एक चम्मच सौंफ मिलाइये। इसको रातभर के लिए ढंक कर रख दीजिये और सुबह उठ कर पानी छान लीजिये। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाइये और तीन टाइम भोजन के बाद इसको लीजिये।
3:एक गिलास गर्म पानी में एक चुटकी कालीमिर्च चूर्ण तथा आधा नींबू निचोड़कर नियमित रूप से सुबह सेवन करें। इसके साथ ही सदाल के रूप मे मूली को जरुर शामिल करें। उस पर काला नमक छिडक कर खाएं।
 4:एक लौंग और एक इलायची ले कर पाउडर बना लें। इसको हर मील के बाद माउथफ्रेशनर के रूप में खाएं। इसको खाने से एसिडिटी भी सही होगी और मुंह से बदबू भी नहीं आएगी।

ऐसे करें बचाव-
1.समय पर भोजन करें और भोजन करने के बाद कुछ देर टहलें ।
2.अपने खाने में ताजे फल, सलाद, सब्जियों का सूप, उबली हुई सब्जी को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित अनाज खूब खाएं। ये विटामिन बी और ई का बेहतरीन स्रोत होते हैं जो शरीर से एसिडिटी को बाहर निकाल देते हैं।
3.खाना हमेशा चबा कर और जरूरत से थोड़ा कम ही खाएं। सदैव मिर्च-मसाले और ज्यादा तेल वाले भोजन से बचें।
4.अपने रोजमर्रा के आहार में मट्ठा और दही शामिल करें।
5.शराब और मांसाहारी भोजन से परहेज करें।
6.पानी खूब पिएं। याद रखें इससे न सिर्फ पाचन में मदद मिलती है, बल्कि शरीर से टॉक्सिन भी बाहर निकल जाते हैं।
7.खाने के बाद तुरंत पानी का सेवन न करें। इसका सेवन कम से कम आधे घंटे के बाद ही करें।
8.धूम्रपान, शराब से बचें।
9.पाइनेपल के जूस का सेवन करें, यह एन्जाइम्स से भरा होता है। खाने के बाद अगर पेट अधिक भरा व भारी महसूस हो रहा है, तो आधा गिलास ताजे पाइनेपल का जूस पीएं। सारी बेचैनी और एसिडिटी खत्म हो जाए
10.आंवले का सेवन करें हालांकि यह खट्टा होता है, लेकिन एसिडिटी के घरेलू उपचार के रूप में यह बहुत काम की चीज है।
11.गैस से फौरन राहत के लिए 2 चम्मच ऑंवला जूस या सूखा हुआ ऑंवला पाउडर और दो चम्मच पिसी हुई मिश्री ले लें और दोनों को पानी में मिलाकर पी जाएं।



बीरबल ने अकबर खाकर लेट जा और मारकर भाग जा

किसी समय बीरबल ने अकबर को यह कहावत सुनाई थी कि खाकर लेट जा और मारकर भाग जा-यह सयाने लोंगों की पहचान है। जो लोग ऐसा करते हैं, जिन्दगी में उन्हें किसी भी प्रकार का दुख नहीं उठाना पड़ता।
एक दिन अकबर को अचानक ही बीरबल की यह कहावत याद आ गई।
दोपहर का समय था। उन्होंने सोचा, बीरबल अवश्य ही खाना खाने के बाद लेटता होगा। आज हम उसकी इस बात को गलत सिध्द कर देगे।
उन्होंने एक नौकर को अपने पास बुलाकर पूरी बात समझाई और बीरबल के पास भेज दिया।
नौकर ने अकबर का आदेश बीरबल को सुना दिया
बीरबल बुध्दिमान तो थे ही, उन्होंने समझ लिया की बादशाह ने उसे क्यों तुरन्त आने के लिए कहा है। इसलिए बीरबल ने भोजन करके नौकर से कहा-'' ठहरो,मैं कपड़े बदलकर तुम्हारे साथ ही चल रहा हु।"
उस दिन बीरबल ने पहनने के लिए चुस्त पाजामा चुना। पाजामे को पहनने के लिए वह कुछ देर के लिए बिस्तर पर लेट गए। पाजामा पहनने के बहाने वे काफी देर बिस्तर पर लेटे रहे। फिर नौकर के साथ चल दिए।
जब बीरबल दरबार में पहुंचे तो अकबर ने कहा-'' कहो बीरबल, खाना खाने के बाद आज भी लेटे या नहीं?''
''
बिलकुल लेटा था जहांपनाह।''
बीरबल की बात सुनकर अकबर ने क्रोधित स्वर में कहा-'' इसका मतलब ,तुमने हमारे हुक्म की अवहेलना की है। हम तुम्हे हुक्म उदूली करने की सजा देंगे। जब हमने खाना खाकर तुरन्त बुलाया था, फिर तुम लेटे क्यों।"
''
बादशाह सलामत ! मेने आपके हुक्म की अवहेलना कहां की है। मैं तो खाना खाने के बाद कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूं।
आप चाहें तो पैगाम ले जाने वाले से पूछ सकते है। अब ये अलग बात है की ये चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था।" बीरबल ने सहज भाव से उतर दिया।
अकबर बादशाह बीरबल की चतुरता को समझ गए और मुस्कुरा पड़े।


किसी समय बीरबल ने अकबर को यह कहावत सुनाई थी कि खाकर लेट जा और मारकर भाग जा-यह सयाने लोंगों की पहचान है। जो लोग ऐसा करते हैं, जिन्दगी में उन्हें किसी भी प्रकार का दुख नहीं उठाना पड़ता।
एक दिन अकबर को अचानक ही बीरबल की यह कहावत याद आ गई।
दोपहर का समय था। उन्होंने सोचा, बीरबल अवश्य ही खाना खाने के बाद लेटता होगा। आज हम उसकी इस बात को गलत सिध्द कर देगे।
उन्होंने एक नौकर को अपने पास बुलाकर पूरी बात समझाई और बीरबल के पास भेज दिया।
नौकर ने अकबर का आदेश बीरबल को सुना दिया
बीरबल बुध्दिमान तो थे ही, उन्होंने समझ लिया की बादशाह ने उसे क्यों तुरन्त आने के लिए कहा है। इसलिए बीरबल ने भोजन करके नौकर से कहा-'' ठहरो,मैं कपड़े बदलकर तुम्हारे साथ ही चल रहा हु।"
उस दिन बीरबल ने पहनने के लिए चुस्त पाजामा चुना। पाजामे को पहनने के लिए वह कुछ देर के लिए बिस्तर पर लेट गए। पाजामा पहनने के बहाने वे काफी देर बिस्तर पर लेटे रहे। फिर नौकर के साथ चल दिए।
जब बीरबल दरबार में पहुंचे तो अकबर ने कहा-'' कहो बीरबल, खाना खाने के बाद आज भी लेटे या नहीं?''
'' बिलकुल लेटा था जहांपनाह।''
बीरबल की बात सुनकर अकबर ने क्रोधित स्वर में कहा-'' इसका मतलब ,तुमने हमारे हुक्म की अवहेलना की है। हम तुम्हे हुक्म उदूली करने की सजा देंगे। जब हमने खाना खाकर तुरन्त बुलाया था, फिर तुम लेटे क्यों।"
'' बादशाह सलामत ! मेने आपके हुक्म की अवहेलना कहां की है। मैं तो खाना खाने के बाद कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूं।
आप चाहें तो पैगाम ले जाने वाले से पूछ सकते है। अब ये अलग बात है की ये चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था।" बीरबल ने सहज भाव से उतर दिया।
अकबर बादशाह बीरबल की चतुरता को समझ गए और मुस्कुरा पड़े।
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हमारा विश्वास, हमारी आशा कहाँ है

किसी जंगल मे एक गर्भवती हिरणी थी जिसका प्रसव होने को ही था . उसने एक तेज धार वाली नदी के किनारे घनी झाड़ियों और घांस के पास एक जगह देखी जो उसे प्रसव हेतु सुरक्षित स्थान लगा.
अचानक उसे प्रसव पीड़ा शुरू होने लगी, लगभग उसी समय आसमान मे काले काले बादल छा गए और घनघोर बिजली कड़कने लगी जिससे जंगल मे आग भड़क उठी .
वो घबरा गयी उसने अपनी दायीं और देखा लेकिन ये क्या वहां एक बहेलिया उसकी और तीर का निशाना लगाये हुए था, उसकी बाईं और भी एक शेर उस पर घात लगायेहुए उसकी और बढ़ रहा था अब वो हिरणी क्या करे ?,
वो तो प्रसव पीड़ा से गुजर रही है ,
अब क्या होगा?,
क्या वो सुरक्षित रह सकेगी?,
क्या वो अपने बच्चे को जन्म दे सकेगी ?,
क्या वो नवजात सुरक्षित रहेगा?,
या सब कुछ जंगल की आग मे जल जायेगा?,
अगर इनसे बच भी गयी तो क्या वो बहेलिये के तीर से बच पायेगी ?
या क्या वो उस खूंखार शेर के पंजों की मार से दर्दनाक मौत मारी जाएगी?
जो उसकी और बढ़ रहा है,
उसके एक और जंगल की आग, दूसरी और तेज धार वाली बहती नदी, और सामने उत्पन्न सभी संकट, अब वो क्या करे?
लेकिन फिर उसने अपना ध्यान अपने नव आगंतुक को जन्म देने की और केन्द्रित कर दिया .
फिर जो हुआ वो आश्चर्य जनक था .
कडकडाती बिजली की चमक से शिकारी की आँखों के सामने अँधेरा छा गया, और उसके हाथो से तीर चल गया और सीधे भूखे शेर को जा लगा . बादलो से तेज वर्षा होने लगी और जंगल की आग धीरे धीरे बुझ
गयी.
इसी बीच हिरणी ने एक स्वस्थ शावक को जन्म दिया .
ऐसा हमारी जिन्दगी मे भी होता है, जब हम चारो और से समस्याओं से घिर जाते है, नकारात्मक विचार हमारे दिमाग को जकड लेते है, कोई संभावना दिखाई नहीं देती , हमें कोई एक उपाय करना होता है.,
उस समय कुछ विचार बहुत ही नकारात्मक होते है, जो हमें चिंता ग्रस्त कर कुछ सोचने समझने लायक नहीं छोड़ते .
ऐसे मे हमें उस हिरणी से ये शिक्षा मिलती है की हमें अपनी प्राथमिकता की और देखना चाहिए, जिस प्रकार हिरणी ने सभी नकारात्मक परिस्तिथियाँ उत्पन्न होने पर भी अपनी प्राथमिकता "प्रसव "पर ध्यान केन्द्रित किया, जो उसकी पहली प्राथमिकता थी. बाकी तो मौत या जिन्दगी कुछ भी उसके हाथ मे था ही नहीं, और उसकी कोई भी क्रिया या प्रतिक्रिया उसकी और गर्भस्थ बच्चे की जान ले सकती थी
उसी प्रकार हमें भी अपनी प्राथमिकता की और ही ध्यान देना चाहिए .
हम अपने आप से सवाल करें,
हमारा उद्देश्य क्या है, हमारा फोकस क्या है ?,
हमारा विश्वास, हमारी आशा कहाँ है,
ऐसे ही मझधार मे फंसने पर हमें अपने इश्वर को याद करना चाहिए ,
उस पर विश्वास करना चाहिए जो की हमारे ह्रदय मे ही बसा हुआ है .
जो हमारा सच्चा रखवाला और साथी है..
Ragupati Raghav Rajaraam
Patit paawan Sitaraam....




Monday, 17 February 2014

अज्ञान का नाश होकर ह्रदय में ज्ञान आ जाता है

महात्माओं में अद्भुत प्रभाव होता है  उनके दर्शन, भाषण, स्पर्श, वार्तालाप से पापों का नाश और दुर्गुण-दुराचारों का अभाव होकर सद्गुण-सदाचार आ जाते है  अज्ञान का नाश होकर ह्रदय में ज्ञान आ जाता है, जिससे हमे सहज ही भगवतप्राप्ति हो जाती है  यह उन महापुरुषों का प्रभाव है, जो भगवान् के भेजे हुए अधिकारी पुरुष है अथवा जो महापुरुष परमात्मा को प्राप्त हो चुके है  ऐसे महात्मा परमात्मा ही बन जाते है  इसलिए परमात्मा के गुण-प्रभाव उनके गुण-प्रभाव है, यह समझना ही महात्मा को तत्व से समझना है 

वास्तव में महात्मा का आत्मा परमात्मा से अलग नहीं है, पर हम मानते नही, उसे परमात्मा से भिन्न समझते है, इसलिए हम परमात्मा की प्राप्ति से वंचित रहते है  यह समझना ही अन्त:करण की शुद्धि होने पर ही होता है 

भक्तिमार्ग में भगवान् से भिन्न रहने पर भी भक्तों की स्थिति विलक्षण होती है  जैसे जीवन्मुक्त ज्ञानी के दर्शन, भाषण, स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है, वैसे ही भगवत्प्राप्त भगवतभक्त के दर्शन, भाषण, स्पर्श से भी हो जाता है  महापुरुषों का रहस्य वास्तव में महापुरुष बनने पर ही समझ में आता है  उनके उददेश्य सर्वथा अलौकिक और अदभुत होता है  उनका अपना तो कोई कर्म रहता ही नहीं  संसार में उनका जो जीवन है यानी शरीर की स्थिति है, तथा जो उनकी चेष्टा है, वह संसार के हित के लिए ही है  जैसे भगवान् का अवतार संसार के उद्धार के लिए होता है, वैसे ही महात्मा पुरुषों का जीवन भी संसार क उद्धार के लिए ही है  

गाजर के गुणों का मुकाबला शायद ही कोई अन्य सब्जी कर सकती है

गाजर के गुणों का मुकाबला शायद ही कोई अन्य सब्जी कर सकती है। इसे सलाद के रूप में कच्चा भी खाया जा सकता है, पका कर इसकी सब्जी भी बनाई जा सकती है तथा रस निकाल कर इसका जूस भी पिया जा सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार गाजर एक फल अथवा सब्जी ही नहीं, अपितु रक्तपित्त तथा कफ को नष्ट करने वाली मीठी, रस से भरी, पेट की अग्नि को बढ़ाने वाली तथा बवासीर जैसे रोग को रोकने वाली जड़ी-बूटी भी है।

गाजर हृदय संबंधी बीमारियों में भी बहुत लाभकारी होती है। यह वीर्य विकार नष्ट करती है तथा शारीरिक कमजोरी में लाभप्रद है।

चूँकि इसमें रक्त अवरोधक शक्ति होती है इसलिए यह रक्तपित्त को बनने नहीं देती।

वैसे इसकी तासीर ठंडी होती है लेकिन यह कफनाशक है। गाजर लौंग तथा अदरक की ही तरह छाती तथा गले में जमे कफ को पिघलाकर निकालने में सक्षम है।

गाजर में कुछ इस प्रकार के खनिज लवण पाए जाते हैं। जो शक्ति को बढ़ाने तथा रोगों को रोकने में बहुत ही आवश्यक होते हैं। शरीर के भीतर ये लवण खून में मिलकर विकार पनपने से रोकते हैं तथा प्रत्येक तंतु एवं प्रत्येक ग्रंथि को स्वस्थ रखते हैं।
गाजर के गुणों का मुकाबला शायद ही कोई अन्य सब्जी कर सकती है। इसे सलाद के रूप में कच्चा भी खाया जा सकता है, पका कर इसकी सब्जी भी बनाई जा सकती है तथा रस निकाल कर इसका जूस भी पिया जा सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार गाजर एक फल अथवा सब्जी ही नहीं, अपितु रक्तपित्त तथा कफ को नष्ट करने वाली मीठी, रस से भरी, पेट की अग्नि को बढ़ाने वाली तथा बवासीर जैसे रोग को रोकने वाली जड़ी-बूटी भी है।

गाजर हृदय संबंधी बीमारियों में भी बहुत लाभकारी होती है। यह वीर्य विकार नष्ट करती है तथा शारीरिक कमजोरी में लाभप्रद है।

चूँकि इसमें रक्त अवरोधक शक्ति होती है इसलिए यह रक्तपित्त को बनने नहीं देती।

वैसे इसकी तासीर ठंडी होती है लेकिन यह कफनाशक है। गाजर लौंग तथा अदरक की ही तरह छाती तथा गले में जमे कफ को पिघलाकर निकालने में सक्षम है।

गाजर में कुछ इस प्रकार के खनिज लवण पाए जाते हैं। जो शक्ति को बढ़ाने तथा रोगों को रोकने में बहुत ही आवश्यक होते हैं। शरीर के भीतर ये लवण खून में मिलकर विकार पनपने से रोकते हैं तथा प्रत्येक तंतु एवं प्रत्येक ग्रंथि को स्वस्थ रखते हैं।