इंसान ज़िंदगी को सुकूनभरा बनाने के लिए हर दिन जूझता है। हालांकि, यह भी सच है कि सुख और दु:ख से भरे ज़िंदगी के सफर को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए गुण, योग्यता, विचार और शक्तियां अहम होती हैं, लेकिन सुरक्षित रहने और दु:खों से परे रहने की सोच और उतावलापन कई मौकों पर इंसान को सुकून के बजाए ज्यादा चिंता में डूबो देता है।
धर्मशास्त्रों में ऐसे ही दु:खों और चिंता से परे जीवन के लिए ऐसे सूत्र बताए गए हैं, जिनमें समाए अर्थ को गंभीरता से समझा जाए तो वह जीवन में संतुलन लाने के साथ तमाम मुश्किलों से निजात दिला सकते हैं।
इसी कड़ी में संकटमोचक देवता और संयम की सीख देने वाले आदर्श देवता हनुमानजी का दु:ख व तनावों से बचने के लिए उजागर भक्ति से जुड़ा रहस्य व्यावहारिक जीवन को साधने के लिए बहुत ही सटीक और कारगर सूत्र भी है। अगली स्लाइड पर क्लिक कर जानिए यह खास व बेजोड़ सूत्र-
हिन्दू धर्मगंथों के मुताबिक हनुमानजी चिरंजीवी यानी अमर देवता माने गए हैं। माना जाता है कि वे हर युग में सशरीर मौजूद होते हैं। इसलिए उनका किसी भी रूप में स्मरण हर संकट व दुःख को टालने वाला माना गया है। श्रीहनुमान चरित्र का एक सुखद पहलू है ‘भक्ति’। इससे जुड़े सुख-शांति के कई सूत्र सांसारिक जीवन में भी कलह व संताप दूर कर देते हैं। इसी कड़ी में रामचरितमानस में श्रीहनुमान के बोल हैं कि–
कह हनुमंत बिपत्ति प्रभु सोई।
जब तब सुमिरन भजन न होई।।
इस चौपाई में श्रीहनुमान द्वारा देव स्मरण, भक्ति और समर्पण की अहमियत बताते हुए जीवन को सुखी बनाने का बहुत ही अच्छा संदेश दिया है। इसमें दु:ख को अच्छा मानते हुए संकेत है कि साधारण इंसान दु:ख को मुसीबत मानता है, लेकिन वास्तव में दु:ख, सुख से श्रेष्ठ इसलिए हो जाता है कि ऐसे वक्त में ही भगवान की याद आती है। इसके विपरीत बुरा समय तो वह होता है जब भगवान का स्मरण न हो।
व्यावहारिक रूप से प्रेरणा यही है कि चूंकि बुरा वक्त इंसान को सोने की तरह तपाकर निखारने वाला होता है। कहा भी जाता है कि सांसारिक जीवन में सुख के साथी प्राणी व दुःख के भगवान होते हैं। इसलिए ऐसे वक्त हिम्मत हारकर रुकने के बजाय इंसान ईश्वर और खुद पर विश्वास रख आगे बढ़ता चले। साथ ही वह दु:ख ही नहीं, बल्कि सुखों में भी अहंकार से परे रहे। सुख-दुःख दोनों को ही ईश्वर की देन मानकर हमेशा सरल और सहज भाव से देव स्मरण कर ज़िंदगी गुजारता चले। श्रीहनुमान के इस सूत्र को अपनाने वाला इंसान बड़े से बड़े दु:ख में भी अस्थिर और अशांत नहीं होगा।
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